खोया है कोई ,तनहा रोया है कोई ,
अरमानो को दफनाए ,अश्को को छिपाए
कोई देखता है हर दिन ख्वाब नया ,
लगाकर हर पल उम्मीद नयी
वो हँसता भी है,वो गाता भी है
जब रोता है,तो मुस्कुराता भी है ,
वो अललड़ भी है, वो पगला भी है
हर ठोकर खाकर संभला भी है
जीता भी है मरने के लिए ,
देखो कैसे मर के कैसे जीता है कोई
हर चाहत से परे वो रहता है,
आंसू की मंदिरा पीता है
गूम है वो अनजाना सा ,
अपना होकर भी बेगाना सा
है डरता है खुद की आहट से,
खो जाता है जाने कहा कोई ,
ये रिश्तों को अपनाता है,
बस अपनों को यह चाहता है ,
वो रोता है ,हंसाता है
फिर खुद पर हंसकर छिप जाता है
फिर करके किस्सा याद कोई ,
जाने कहा खो जाता है ,
वो सबके ही तो जैसा है ,
कभी पूछे कोई वो कैसा है ,
रूठता है,खुद मान जाता है,
बस हंस कर हर गम भुलाता है,
सबको कुछ सिखलाता है ,
देखो ऐसा भी होता है इंसान कोई.....
देखो ऐसा भी होता है इंसान कोई.......
this is written by one of a known persun and a writer..who inspires me to be here...dis is for you buddy
ReplyDeletewell i wud just like to thank u bto join blog world... d creation is awesum...keep it up...waiting for more...
ReplyDeleteall d best
Its really nice and thoughtful, describing the true nature of man, inculcated by the God, unlike man made artificial behavior.
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