वो लम्हे

नयी शुरुवात के साथ कुछ खट्टी मीठी यादो
को संजोना चाहती हूँ

Friday, June 25, 2010

wriiten by you ,,m jst copying it here...

खोया है कोई ,तनहा रोया है कोई ,
अरमानो को दफनाए ,अश्को को छिपाए
कोई देखता है हर दिन ख्वाब नया ,
लगाकर हर पल उम्मीद नयी
वो हँसता भी है,वो गाता भी है
जब रोता है,तो मुस्कुराता भी है ,
वो अललड़ भी है, वो पगला भी है
हर ठोकर खाकर संभला भी है
जीता भी है मरने के लिए ,
देखो कैसे मर के कैसे जीता है कोई
हर चाहत से परे वो रहता है,
आंसू की मंदिरा पीता है
गूम है वो अनजाना सा ,
अपना होकर भी बेगाना सा
है डरता है खुद की आहट से,
खो जाता है जाने कहा कोई ,
ये रिश्तों को अपनाता है,
बस अपनों को यह चाहता है ,
वो रोता है ,हंसाता है
फिर खुद पर हंसकर छिप जाता है

फिर करके किस्सा याद कोई ,
जाने कहा खो जाता है ,
वो सबके ही तो जैसा है ,
कभी पूछे कोई वो कैसा है ,
रूठता है,खुद मान जाता है,
बस हंस कर हर गम भुलाता है,
सबको कुछ सिखलाता है ,
देखो ऐसा भी होता है इंसान कोई.....

देखो ऐसा भी होता है इंसान कोई.......

3 comments:

  1. this is written by one of a known persun and a writer..who inspires me to be here...dis is for you buddy

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  2. well i wud just like to thank u bto join blog world... d creation is awesum...keep it up...waiting for more...
    all d best

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  3. Its really nice and thoughtful, describing the true nature of man, inculcated by the God, unlike man made artificial behavior.

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